Tuesday, May 18, 2010
Monday, May 17, 2010
જેની કોઈ ઉપમા આપી ન સકાય અનુ નામ છે "મા"
જેની કોઈ સીમા નથી તેનું નામ છે "મા"
જેને કેઈરેય પાનખર નથી નદી તેનું નામ છે "મા"
આવી ત્રોણ મા છે. પરમાત્મા, મહાત્મા, ને "મા"
યુવાનો પ્રભુ ને પામવાનું પહેલું ચરણ "મા" છે
જે તળેટી ને અવગણે તે શિખર ને પામે તે શક્યા નથી.
આવી મા ને અવગણી હજારો માળા ગણી
આપણે પ્રભુ ભણી જઈ શકીએ તે વાત દુર ઘણી...
જેની કોઈ સીમા નથી તેનું નામ છે "મા"
જેને કેઈરેય પાનખર નથી નદી તેનું નામ છે "મા"
આવી ત્રોણ મા છે. પરમાત્મા, મહાત્મા, ને "મા"
યુવાનો પ્રભુ ને પામવાનું પહેલું ચરણ "મા" છે
જે તળેટી ને અવગણે તે શિખર ને પામે તે શક્યા નથી.
આવી મા ને અવગણી હજારો માળા ગણી
આપણે પ્રભુ ભણી જઈ શકીએ તે વાત દુર ઘણી...
Friday, May 14, 2010
'माँ
'माँ, तुम भी ना! बहुत सवाल करती हो? मैं और सुमि तुम्हें कितनी बार तो बता चुके हैं। एक बार ठीक से समझ लिया करो ना! पच्चीसों बार पूछ चुकी हो, रामी बुआ के बेटे की शादी का कार्यक्रम। समय पर आपको ले चलेंगे ना!' भुनभुनाता हुआ बेटा बोले जा रहा था, ''अभी मुझे ऑफिस में देर हो रही है। सुमि! माँ को सारे कार्यक्रम जरा एक बार और बता देना। अब बार-बार मत पूछना माँ! कहते हुए बेटा बैग उठाकर निकल गया।
माँ की आँखें भर आई। आजकल कोई बात याद ही नहीं रहती, पर फिर भी बरसों पुरानी बातें याद थीं। यही मुन्ना दिन में सौ मर्तबा पूछता रहता था- माँ, बताओ ना! तितली का रंग हाथ में क्यों लग गया? क्या वो पीले रंग से होली खेल कर आई है? माँ, हम मंदिर जाते हैं तो भगवान बोलते क्यों नहीं? भगवान सुनते कैसे हैं? बताओ ना माँ?
आँखें भर आने से माँ की आँखें धुँधलाने लगी थी।
माँ की आँखें भर आई। आजकल कोई बात याद ही नहीं रहती, पर फिर भी बरसों पुरानी बातें याद थीं। यही मुन्ना दिन में सौ मर्तबा पूछता रहता था- माँ, बताओ ना! तितली का रंग हाथ में क्यों लग गया? क्या वो पीले रंग से होली खेल कर आई है? माँ, हम मंदिर जाते हैं तो भगवान बोलते क्यों नहीं? भगवान सुनते कैसे हैं? बताओ ना माँ?
आँखें भर आने से माँ की आँखें धुँधलाने लगी थी।
मातृ-दिवस मदर्स-डे माता-दिवस माँ
माँ! एक ऐसा शब्द है, जिसे याद करते ही मन में एक फुरफुरी-सी दौड़ने लगती है। चाहे वह कोई भी माँ, किसी की भी माँ हो सभी के लिए एक समान ही यह गरिमामय भाव अंतर्मन में होता है। माँ को जितने भी शब्दों से नवाजा जाएँ वे अपने आप में कम ही रहेंगे। क्योंकि माँ वो गरिमामय शब्द है जिसकी व्याख्या करना बहुत ही मुश्किल है।
माँ का सफर जन्म होने के दिन से ही शुरू हो जाता है। सभी को यह लगता है कि एक बेटी ने जन्म लिया है इसका मतलब है उसे अपनी जिंदगी में सीढ़ी दर सीढ़ी काम करते ही चले जाना है। पहले एक बेटी, फिर एक युवती, फिर एक बहू और पत्नी फिर आता है माँ बनने का सफर।
माँ बनने के साथ ही उसके अपने सारे हक, उसकी अपनी सारी इच्छाएँ और महत्वाकांक्षाएँ भुला कर उसे अपने कर्तव्यों को निभाने की जिम्मेदारी निभाना पड़ता है। फिर भले ही इन सब में उसकी इच्छा हो ना हो। उसे इन सारे दौर से गुजरना ही पड़ता है। चाहे मन से,चाहे बेमन से लेकिन उसके जन्म के साथ ही ये सारे उसके साथी बन जाते हैं।
उसके माँ बनने के पूर्व ही ससुराल वालों की निगाहें उस पल का इंतजार कर रही होती है कि वह बेटे की माँ बनती है या बेटी की। माँ बनना ससुराल वालों के लिए इतना मायने नहीं रखता जितना उसका बेटे को जन्म देना मायने रखता है।
बेटा-बेटी की आस लिए माँ बनने का उसका यह सफर सही मायने में यही से शुरू हो जाता है। अगर बेटे की माँ बन गई तो वह ससुराल वालों की आँखों का तारा बन जाती है। अगर बेटी को जन्म दिया है तो इस दुख के साथ कि 'बेटी जनी है'। उसको तानों और कष्टों में ही अपना जीवन गुजारना पड़ता है। यह तब बात और भी ज्यादा दुखद हो जाती है जब वह दो-तीन बेटियों को जन्म दे चुकी होती हैं।
NDवह खुद जो अभी-अभी माँ बनी है, वह माँ क्या चाहती है, उसे बेटा पसंद है या बेटी?इस बात से किसी को कोई सरोकार नहीं होता। उसके दिल में चल रही कशमकश से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता! फर्क पड़ता है तो सिर्फ उस माँ को जिसने अभी-अभी उस बच्चे को जन्म दिया है। उस माँ का मन कचोटकर रह जाता है पर फिर भी क्या लोग उसके मन की भावनाएँ, उसके मन की उलझन को समझने की कोशिश करते हैं? नहीं करते...!
फिर भी वो माँ अपने सारे गमों को भुलाकर, जीवन में आ रही हर परेशानी को अपने से दूर रखकर अपना सारा प्यार-दुलार अपने बच्चे पर उँडेल देती है। अपनी मातृत्व की छाँव उस पर बनाए रखती है। ऐसी माँ के 'आदर' स्वरूप सिर्फ एक दिन 'मदर्स डे' मनाकर कभी भी नहीं किया जा सकता। ऐसी माँ के लिए तो मानव जीवन ही कुर्बान होना चाहिए।
ऐसी देवी माँ हो या साधारण माँ जिसने भगवानों से लेकर कई महापुरुषों, कई वीरांगनाओं और वीरों को जन्म दिया है। जिसने देश-दुनिया को कई अविस्मरणीय संतानों ने नवाजा है, ऐसी माँ के लिए तो हर दिन मनाया गया मातृ दिवस भी कम पड़ जाएगा। उसके उपकारों के आगे हमारी हर पूजा छोटी है, हर उपहार कम है। ऐसी जननी को मातृ दिवस यानी मदर्स डे पर मेरा शत-शत नमन....। हे माँ ! आपकी महिमा अपरंपार है...।
माँ का सफर जन्म होने के दिन से ही शुरू हो जाता है। सभी को यह लगता है कि एक बेटी ने जन्म लिया है इसका मतलब है उसे अपनी जिंदगी में सीढ़ी दर सीढ़ी काम करते ही चले जाना है। पहले एक बेटी, फिर एक युवती, फिर एक बहू और पत्नी फिर आता है माँ बनने का सफर।
माँ बनने के साथ ही उसके अपने सारे हक, उसकी अपनी सारी इच्छाएँ और महत्वाकांक्षाएँ भुला कर उसे अपने कर्तव्यों को निभाने की जिम्मेदारी निभाना पड़ता है। फिर भले ही इन सब में उसकी इच्छा हो ना हो। उसे इन सारे दौर से गुजरना ही पड़ता है। चाहे मन से,चाहे बेमन से लेकिन उसके जन्म के साथ ही ये सारे उसके साथी बन जाते हैं।
उसके माँ बनने के पूर्व ही ससुराल वालों की निगाहें उस पल का इंतजार कर रही होती है कि वह बेटे की माँ बनती है या बेटी की। माँ बनना ससुराल वालों के लिए इतना मायने नहीं रखता जितना उसका बेटे को जन्म देना मायने रखता है।
बेटा-बेटी की आस लिए माँ बनने का उसका यह सफर सही मायने में यही से शुरू हो जाता है। अगर बेटे की माँ बन गई तो वह ससुराल वालों की आँखों का तारा बन जाती है। अगर बेटी को जन्म दिया है तो इस दुख के साथ कि 'बेटी जनी है'। उसको तानों और कष्टों में ही अपना जीवन गुजारना पड़ता है। यह तब बात और भी ज्यादा दुखद हो जाती है जब वह दो-तीन बेटियों को जन्म दे चुकी होती हैं।
NDवह खुद जो अभी-अभी माँ बनी है, वह माँ क्या चाहती है, उसे बेटा पसंद है या बेटी?इस बात से किसी को कोई सरोकार नहीं होता। उसके दिल में चल रही कशमकश से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता! फर्क पड़ता है तो सिर्फ उस माँ को जिसने अभी-अभी उस बच्चे को जन्म दिया है। उस माँ का मन कचोटकर रह जाता है पर फिर भी क्या लोग उसके मन की भावनाएँ, उसके मन की उलझन को समझने की कोशिश करते हैं? नहीं करते...!
फिर भी वो माँ अपने सारे गमों को भुलाकर, जीवन में आ रही हर परेशानी को अपने से दूर रखकर अपना सारा प्यार-दुलार अपने बच्चे पर उँडेल देती है। अपनी मातृत्व की छाँव उस पर बनाए रखती है। ऐसी माँ के 'आदर' स्वरूप सिर्फ एक दिन 'मदर्स डे' मनाकर कभी भी नहीं किया जा सकता। ऐसी माँ के लिए तो मानव जीवन ही कुर्बान होना चाहिए।
ऐसी देवी माँ हो या साधारण माँ जिसने भगवानों से लेकर कई महापुरुषों, कई वीरांगनाओं और वीरों को जन्म दिया है। जिसने देश-दुनिया को कई अविस्मरणीय संतानों ने नवाजा है, ऐसी माँ के लिए तो हर दिन मनाया गया मातृ दिवस भी कम पड़ जाएगा। उसके उपकारों के आगे हमारी हर पूजा छोटी है, हर उपहार कम है। ऐसी जननी को मातृ दिवस यानी मदर्स डे पर मेरा शत-शत नमन....। हे माँ ! आपकी महिमा अपरंपार है...।
माँ तो माँ है........
माँ
कमर झुक गई
प्यार वैसा ही है
याद है
कैसे रोया बचपन में सुबक-सुबककर
माँ ने पोंछे आँसू
खुरदरी हथेलियों से
कहानी सुनाते-सुनाते
चुपड़ा ढेर सारा प्यार गालों पर
सुबह-सुबह रोटी पर रखा ताज़ा मक्*खन
रात में सुनाई
सोने के लिए लोरियाँ
इस उम्र में भी
थकी नहीं
माँ तो माँ है।.........
कमर झुक गई
प्यार वैसा ही है
याद है
कैसे रोया बचपन में सुबक-सुबककर
माँ ने पोंछे आँसू
खुरदरी हथेलियों से
कहानी सुनाते-सुनाते
चुपड़ा ढेर सारा प्यार गालों पर
सुबह-सुबह रोटी पर रखा ताज़ा मक्*खन
रात में सुनाई
सोने के लिए लोरियाँ
इस उम्र में भी
थकी नहीं
माँ तो माँ है।.........
my sweet mother.......................
To the one who gave me life
I can give nothing but love
To the star so full of light
to the one sent from up above.
Thank you for the discipline
for everything you do
thank you for than happiness
thanks for seeing me through.
You’re like a burning candle
there to light our way
Sometimes unable to handle
the arguments each day.
I love you more than anything
I’ll
love you
to the end
you are my mother first
then my very best friend.
It is unusual what we share
everything I do you know,
every beautiful quality
you have in you, I show.
Not often enough do I tell you
how much you mean to me
Not often enough do I show you
what it means for you to let me be free
Life ever-lasting is what I wish for you
to my heart you’ve taught me
to be sacred and be true
To live forever and always
Is what I wish for you.
You are my special angel
who I always find comfort in
whether life is in shambles
when I lose and when I win
To the one who gave me life,
I can give nothing but love
to the one who genuinely is,
sent from heaven above.
I can give nothing but love
To the star so full of light
to the one sent from up above.
Thank you for the discipline
for everything you do
thank you for than happiness
thanks for seeing me through.
You’re like a burning candle
there to light our way
Sometimes unable to handle
the arguments each day.
I love you more than anything
I’ll
love you
to the end
you are my mother first
then my very best friend.
It is unusual what we share
everything I do you know,
every beautiful quality
you have in you, I show.
Not often enough do I tell you
how much you mean to me
Not often enough do I show you
what it means for you to let me be free
Life ever-lasting is what I wish for you
to my heart you’ve taught me
to be sacred and be true
To live forever and always
Is what I wish for you.
You are my special angel
who I always find comfort in
whether life is in shambles
when I lose and when I win
To the one who gave me life,
I can give nothing but love
to the one who genuinely is,
sent from heaven above.
my sweet mother...................
Zindagi Main Kuch Paya Or Kuch Koya
Lakin Tuje Khona Nhi Chahtha Maa
Zindagi Ne Kabhi Hasaya Or Kabhi Rulaya
Lakin Tuje Rulana Nhi Chahtha Maa
Yaad Athi Hai bahot Tere Bachpan Ki Wo Lory
Isi Liye Tere Ghod K Ilawa Kahin Or Sona Nhi Chahtha Maa
Kithna Danta Tha Tune Bachpan Main
Ab Q Nhi Dandthi Tu Muja Maa
Kesa Zinda Reh Paonga Main Tere Baghair
Kabhi Fursat Mile Muja Tu Ye Tho Batha Maa
Kiya Hoon Main Tere Dil Main Ab Thak?
Kabhi Tho Dhek Mere Dil Ko Cheer K Apne Aap Ko Maa
Kabhi Tho Kila Muja Apne Hath Ki Roti
Aaj Kal Bhuk Bohoth Lagthi Hai Muja Maa
Kahaan Ho Tum, A Kar Lagalo Gale Iss Bebas balak Ko
Na Jane Kis Kash Main Nikal Jaye Meri Saans Maa............................
Lakin Tuje Khona Nhi Chahtha Maa
Zindagi Ne Kabhi Hasaya Or Kabhi Rulaya
Lakin Tuje Rulana Nhi Chahtha Maa
Yaad Athi Hai bahot Tere Bachpan Ki Wo Lory
Isi Liye Tere Ghod K Ilawa Kahin Or Sona Nhi Chahtha Maa
Kithna Danta Tha Tune Bachpan Main
Ab Q Nhi Dandthi Tu Muja Maa
Kesa Zinda Reh Paonga Main Tere Baghair
Kabhi Fursat Mile Muja Tu Ye Tho Batha Maa
Kiya Hoon Main Tere Dil Main Ab Thak?
Kabhi Tho Dhek Mere Dil Ko Cheer K Apne Aap Ko Maa
Kabhi Tho Kila Muja Apne Hath Ki Roti
Aaj Kal Bhuk Bohoth Lagthi Hai Muja Maa
Kahaan Ho Tum, A Kar Lagalo Gale Iss Bebas balak Ko
Na Jane Kis Kash Main Nikal Jaye Meri Saans Maa............................
Zindagi Main Kuch Paya Or Kuch KoyaLakin Tuje Khona Nhi Chahtha Maa
Zindagi Ne Kabhi Hasaya Or Kabhi RulayaLakin Tuje Rulana Nhi Chahtha Maa
Yaad Athi Hai bahot Tere Bachpan Ki Wo LoryIsi Liye Tere Ghod K Ilawa Kahin Or Sona Nhi Chahtha Maa
Kithna Danta Tha Tune Bachpan MainAb Q Nhi Dandthi Tu Muja Maa ..
Kabhi Tho Kila M...uja Apne Hath Ki RotiAaj Kal Bhuk Bohoth Lagthi Hai Muje Maa ....................................
Zindagi Ne Kabhi Hasaya Or Kabhi RulayaLakin Tuje Rulana Nhi Chahtha Maa
Yaad Athi Hai bahot Tere Bachpan Ki Wo LoryIsi Liye Tere Ghod K Ilawa Kahin Or Sona Nhi Chahtha Maa
Kithna Danta Tha Tune Bachpan MainAb Q Nhi Dandthi Tu Muja Maa ..
Kabhi Tho Kila M...uja Apne Hath Ki RotiAaj Kal Bhuk Bohoth Lagthi Hai Muje Maa ....................................
Wednesday, May 12, 2010
Tuesday, May 11, 2010
“મા તે મા, બાકી બધા વગડાના વા''
પ્રેમને સાકાર થવાનું મન થયું ને ‘મા’નું સર્જન થયું.
પ્રભુને પણ અવતરવું પડે છે, ને મા ની ગોદમાં રમવું પડે છે,
મા એ તો મા છે… બધાને ત્યાં વિરમવું પડે છે.
રડવું હોય તો ખભો કોઇનોય મળે, પણ ખોળો તો મલકમાં ‘મા’નો જ મળે.
‘મા’ ગંગા કરતાં પણ મહાન છે, ગંગા સુકાય, મા નહિં.
મા એ પૂર્ણ શબ્દ છે ગ્રંથ છે,
યુનિવર્સીટી છે, મા મંત્ર બીજ છે પ્રત્યેક સર્જનનો આઘાર છે મા,
મંત્ર તંત્ર ને યંત્રની સફળતાનો મુલાધાર છે મા.
જેને કોઇ ઉપમા આપી ન શકાય એનું નામ છે ‘મા’,
જેની કોઇ સીમા નથી તેનું નામ છે ‘મા’.
મારે ખરી, પણ… માર ખાવા ન દે એનું નામ “મા”.
શિવની જટામાં માત્ર ગંગા જ અવતરી છે,
પરંતુ માના જીગરે તો કંઇક ગંગા અને મહાસાગરો ઉમટયા છે.
પૃથ્વી પરનો સૌથી મહાન, સૌથી પવિત્ર શબ્દ છે “મા”.
બાળકને રાહ બતાવે તેનું નામ ગુરૂ પરંતુ,
બાળકની રાહ જુએ તેનું નામ માતા.
મા ના પ્રેમમાં કદી રૂકાવટ હોતી નથી.
મા ના વિચારમાં કદી મિલાવટ હોતી નથી.
“મા”નું મૂલ્યાંકન થઈ શકે તેવી કોઇ વ્યક્તિ કે શબ્દો નથી,
માટે જ કહેવાય છે કે “મા તે મા, બાકી બધા વગડાના વા
પ્રભુને પણ અવતરવું પડે છે, ને મા ની ગોદમાં રમવું પડે છે,
મા એ તો મા છે… બધાને ત્યાં વિરમવું પડે છે.
રડવું હોય તો ખભો કોઇનોય મળે, પણ ખોળો તો મલકમાં ‘મા’નો જ મળે.
‘મા’ ગંગા કરતાં પણ મહાન છે, ગંગા સુકાય, મા નહિં.
મા એ પૂર્ણ શબ્દ છે ગ્રંથ છે,
યુનિવર્સીટી છે, મા મંત્ર બીજ છે પ્રત્યેક સર્જનનો આઘાર છે મા,
મંત્ર તંત્ર ને યંત્રની સફળતાનો મુલાધાર છે મા.
જેને કોઇ ઉપમા આપી ન શકાય એનું નામ છે ‘મા’,
જેની કોઇ સીમા નથી તેનું નામ છે ‘મા’.
મારે ખરી, પણ… માર ખાવા ન દે એનું નામ “મા”.
શિવની જટામાં માત્ર ગંગા જ અવતરી છે,
પરંતુ માના જીગરે તો કંઇક ગંગા અને મહાસાગરો ઉમટયા છે.
પૃથ્વી પરનો સૌથી મહાન, સૌથી પવિત્ર શબ્દ છે “મા”.
બાળકને રાહ બતાવે તેનું નામ ગુરૂ પરંતુ,
બાળકની રાહ જુએ તેનું નામ માતા.
મા ના પ્રેમમાં કદી રૂકાવટ હોતી નથી.
મા ના વિચારમાં કદી મિલાવટ હોતી નથી.
“મા”નું મૂલ્યાંકન થઈ શકે તેવી કોઇ વ્યક્તિ કે શબ્દો નથી,
માટે જ કહેવાય છે કે “મા તે મા, બાકી બધા વગડાના વા
Subscribe to:
Posts (Atom)
